Jain Dharm in Hindi

जैन धर्म

जैन धर्म के संस्थापक ऋषभदेव थे 24 वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी को

जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है

तीर्थ कार का अर्थ होता है पथ प्रदर्शक

उनका जन्म बिहार के कुंडल ग्राम वैशाली में 540 ईसा पूर्व में हुआ था

इनके पिता का नाम सिद्धार्थ था तथा माता का नाम त्रिशला था

इनकी पत्नी का नाम यशोदा तथा पुत्री का नाम अनोज्ज था

यह सत्य की खोज के लिए 30 वर्ष की आयु में सन्यासी हो गए

12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद जुम्भी ग्राम के निकट ऋजुपालिका नदी के की तट पर साल वृक्ष के नीचे सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई

30 वर्षों तक आपने शिक्षा का उपदेश देने के बाद 468 ईसा पूर्व में राजगृह के निकट पावापुरी में 72 वर्ष की आयु में देहांत हो गया

जैन धर्म के सिद्धांत

1.  निर्वाण की प्राप्ति त्रिरत्नो से होती है यह त्रिरत्न है
-सच्चा विश्वास
– सच्चा ज्ञान तथा
-सही आचरण

2.  सभी सजीव वस्तुओं के प्रति विचारों शब्दों या कर्मों में अहिंसा में विश्वास

3.  ईश्वर की सत्ता से इनकार तथा धर्म विधियों की अस्वीकृति के जरिए कर्म में विश्वास

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