Law of Motion

गति के नियम

गति – अन्य वस्तुओं की अपेक्षा किसी वस्तु की स्थिति में का इस समय में होने वाले परिवर्तन को गति कहते हैं

चाल- वैसी गति जिसमें दिशा नहीं हो चाल कहलाती है

वेग- दिसायुक्त गति को वेज कहते हैं

त्वरण- वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं यह सदिश राशि है इसे सामान्यतः a द्वारा सूचित किया जाता है

जड़त्व – किसी कण अथवा पिंड द्वारा अपनी अवस्था (गति की अवस्था अथवा विराम की अवस्था) को यथावत बनाए रखने की प्रवृत्ति को जड़त्व कहा जाता है

न्यूटन गति के नियम

गति का पहला नियम

कोई भी वस्तु अपनी पूर्व अवस्था बनाए रखना चाहती है जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल नहीं लगाया जाए प्रथम नियम से स्पष्ट होता है कि बल वह भौतिक कारण है जो वस्तु की अवस्था विराम अवस्था से गति अवस्था को परिवर्तित करता है अथवा परिवर्तन करने की चेष्टा करता है इस प्रकार न्यूटन के गति के प्रथम नियम से बल एवं जड़त्व की परिभाषा प्राप्त होती है परंतु बल का परिमाण ज्ञात नहीं होता है

गति के दूसरा नियम

किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण लगाए गए बल का समानुपाती और वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है

अर्थात “a” त्वरण, “F” बल एवं “m” द्रव्यमान हो तो नियम F=ma है बल का एस आई SI मात्रक न्यूटन होता है तथा सीजीएस CGS पद्धति में डाइन होता है 1 न्यूटन = 10^5 डाइन

संवेग – किसी वस्तु के वेग एवं द्रव्यमान के गुणनफल को उसका संवेग कहा जाता है और इसे P द्वारा सूचित किया जाता है यह एक सदिश राशि है

संवेग संरक्षण का सिद्धांत

संवेग संरक्षण के अनुसार एक या एक से अधिक वस्तुओं की निकाय का संवेग तब तक अपरिवर्तित रहता है जब तक वस्तुओं का वस्तु या वस्तु के निकाय पर कोई बाह्य बल आरोपित ना हो

जब बंदूक से गोली छोड़ी जाती है तो वह अत्यधिक वेग से आगे की ओर बढ़ती है जिससे गोली में आगे की दिशा में संदेह उत्पन्न हो जाता है गोली भी बंदूक की प्रतिक्रिया बल के कारण पीछे की ओर ढकेल देती है क्योंकि बंदूक का द्रव्यमान गोली से अधिक होता है
अतः बंदूक के पीछे हटने का वेग गोली के वेग से बहुत कम होता है
राकेट के ऊपर जाने का सिद्धांत भी संवेग संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित होता है

कोणिय संवेग – घूर्णन गति करते हुए किसी पिंड की कोणिय वेग तथा जड़त्व आघूर्ण के गुणनफल को पिंड का कोणीय संवेग कहा जाता है यदि घूर्णन करते पिंड का कोणिय वेग ओमेगा (w) हो तथा जड़त्व घूर्णन (I) हो तो कोणीय संवेग = Iw

कोणीय संवेग = कोणिय वेग x जड़त्व आघूर्ण होगा

आवेग- बल एवं उसके कार्य करने के समय के गुणनफल को आवेग कहते हैं अभी एक सदिश राशि है और इसका मान संवेग- परिवर्तन के बराबर होता है
उदाहरण-  कैच लेते समय क्रिकेट खिलाड़ी का हाथ पीछे की ओर खींचना

गति का तीसरा नियम

प्रत्येक क्रिया के बराबर एवं विपरीत एक प्रतिक्रिया होती है

घर्षण – जब कोई वस्तु किसी सतह पर सरकती या लुढ़कती है तो चलने की चेष्टा करती है तब संपर्क की सतहों के बीच घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है जो गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है

गुरुत्वाकर्षण – जिस बल के कारण दो वस्तुएं एक दूसरे को आकर्षित करती हैं उसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं किसी वस्तु पर पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल को उस वस्तु पर पृथ्वी का “गुरुत्व बल” कहा जाता है

गुरुत्वीय त्वरण – त्वरण गिरती हुई वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता यह पृथ्वी के द्रव्यमान एवं केंद्र की दूरी पर निर्भर करता है

गुरुत्व त्वरण मुक्त रूप से पृथ्वी की ओर गिरती हुई किसी वस्तु के वेग में प्रति सेकंड होने वाली वृद्धि को प्रदर्शित करता है

गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न भिन्न होता है भूमध्य रेखा पर इस का मान सबसे कम एवं ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है

भार-  जिस बल द्वारा पृथ्वी किसी वस्तु को अपनी ओर खींचती है उस पल को वस्तु का भार कहते हैं इसे प्राय: W से निरूपित किया जाता है इसका भार का एसआई (SI) मात्रक न्यूटन होता है और यह एक सदिश राशि है

भारहीनता – भारहीनता वह स्थिति है जब वस्तु को अपने भार नगण्य प्रतीत होता है या निम्नलिखित तीन परिस्थितियों में होता है :-
पहला – पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे व्यक्ति उपग्रह में भारहीनता का अनुभव करता है पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा उपग्रह पृथ्वी पर अभिकेंद्र बल लगाता है जो कि पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने से उत्पन्न अपकेंद्र बल के बराबर होता है साथ ही दोनों एक दूसरे को संतुलित करते हैं जिससे परिणामी आकर्षण बल का मान शुन्य हो जाता है

लिफ्ट टूटने पर नीचे की ओर गिर रहा व्यक्ति

पृथ्वी के केंद्र पर बैठा व्यक्ति

अभिकेंद्र बल – एक समान वृत्तीय गति में बल केंद्र की ओर कार्य करता है उसे अभिकेंद्र बल कहलाता है यह वास्तविक बल होता है

इस बल के अभाव में वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर नहीं चल सकती है

उदाहरण – जब हम एक पत्थर के टुकड़े को दूरी से एक सिरे से बांधकर घूमाते हैं तो हमें डोरी पर तनाव लगाना पड़ता है

पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना इलेक्ट्रॉन का नाभिक के चारों ओर घूमना

चौराहे पर मुड़ते समय साइकिल सवार का झुक जाना

अपकेंद्र बल – इसका का परिमाण अभिकेंद्र बल के बराबर होता है इसकी दिशा केंद्र से दूरी होती है अभिकेंद्र बल एवं अपकेंद्र बल का द्वारा किया गया कार्य शुन्य होता है

उदाहरण :- सर्कस में मौत के कुए का खेल

कपड़ा सुखाने की मशीन

दूध से मक्खन निकालने की मशीन

पलायन वेग :- उस न्यूनतम वेग को पलायन कहते हैं जिसके साथ वस्तु को उर्धवाधरत: ऊपर की ओर फेंकने पर वह अनंत तक पहुंच सके यह वेग पृथ्वी अथवा अन्य ग्रहों के मात्रा या त्रिज्या पर निर्भर करता है

पृथ्वी के लिए पलायन वेग का मान 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड तथा चंद्रमा के लिए 2.4 किलोमीटर प्रति सेकंड होता है

चंद्रमा का पर पलायन वेग का मान कम होने के कारण ही वायुमंडल नहीं है

लिफ्ट और भार – यदि लिफ्ट ऊपर की ओर जाता है तो प्रतीत भार वास्तविक भार से अधिक होता है यदि नीचे की ओर आता है तो कम एवं यदि स्थिर रहता है तो वास्तविक भार के बराबर होता है

गुरुत्व केंद्र – किसी वस्तु का गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जहां उस वस्तु का किसी विशेष स्थिति में भारत केंद्रित हो अथवा कार्य करता है किसी वस्तु के निश्चित आकार एवं आकृति के लिए यह नियत रहता है

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