Sounds notes in Hindi

ध्वनी (Sounds) – ध्वनि एक तरंग है जो वस्तु के कंपन से उत्पन्न होती है और आगे बढ़ती है तथा हमारे कानों में संवेदना उत्पन्न करती है

ध्वनि तरंग (Sound waves) – वे तरंगे जो ध्वनि का संचरण करती है ध्वनि तरंग कहलाती है

यह केवल अनुदैर्ध्य तरंग ही होती है
ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है यही कारण है कि चंद्रमा पर ध्वनि नहीं सुनी जा सकती है

ध्वनि तरंगों का आवृत्ति परिसर

यांत्रिक तरंगों को उनके आवृत्ति परिसर के आधार पर मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है

श्रव्य तरंगे – श्रव्य तरंगे वे तरंगे होती हैं जिनकी आवृत्ति का परिसर 20 हर्टज से लेकर 20000 हर्टज तक होता है इन तरंगों को हमारे कान सुन सकते हैं

अवश्रव्य तरंगे – अवश्रव्य तरंगे वे तरंगे हैं जिनकी आवृत्ति 20 हर्टज से कम होती है यह तरंगे हमें सुनाई नहीं देती है हमारे हृदय की धड़कन की आवृत्ति अवश्रव्य तरंगे हैं

पराश्रव्य तरंगें – पराश्रव्य तरंगें अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगें हैं जिनकी आवृत्ति 20000 हर्टज से अधिक होती है जब कुछ पदार्थों जैसे क्वार्टज़, जिंक ऑक्साइड केक्रिस्टलो पर प्रत्यावर्ती वोल्टेज आरोपित किया जाता है तो उनके कंपन से भी पराश्रव्य तरंगें उत्पन्न होती हैं

सोनार यह एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा समुद्र में डूबी हुई वस्तुओं का पता लगाया जाता है

राडार यह एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा वायु में उड़ रहे जहाजों का पता लगाया जाता है

ध्वनियों के लक्षण

तीव्रता (Intensity) – तीव्रता ध्वनि का वह लक्षण है जिसके कारण हमें कोई ध्वनि धीमा या तेज सुनाई देती है

कंपन का आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि की तीव्रता उतनी ही अधिक होगी

ध्वनि की तीव्रता डेसीबल में मापी जाती है

तारत्व (Pitch) – तारत्व तो ध्वनि का वह लक्षण है जिसके कारण ध्वनि को मोटी या पतली कहते हैं

ध्वनि का तारत्व उसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है अधिक आवृत्ति की ध्वनि का तारत्व अधिक होता है जैसे- शेर की दहाड़ तथा मच्छर की भिनभिनाहट से मच्छर की भिनभिनाहट का तारत्व अधिक होता है

गुणता(Quality) – गुणता ध्वनि का वह लक्षण है, जो सामान तीव्रता एवं समान आवृतियों के ध्वनि में अंतर स्पष्ट करता है

ध्वनि का वेग – ध्वनि का वेग ठोस में अधिकतम, द्रव में उससे कम तथा गैसों में सबसे कम होता है

ध्वनि वेग पर विभिन्न कारकों का प्रभाव

ताप का प्रभाव – माध्यम का तापक्रम बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ता है 0 डिग्री सेल्सियस शुष्क वायु में ध्वनि की चाल 332 मीटर प्रति सेकंड होती है जल में ध्वनि की चाल लगभग 1450 मीटर प्रति सेकंड होती है

दबाव का प्रभाव – ध्वनि पर कोई दबाव का प्रभाव नहीं पड़ता है

घनत्व का प्रभाव – ठोस एवं द्रव में घनत्व का मान बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ता है जबकि गैसों में घनत्व बढ़ने पर यह घटता है यही कारण है कि हाइड्रोजन में ध्वनि का वेग कार्बन डाइऑक्साइड में ध्वनि के वेग से अधिक होता है

हवा का प्रभाव – हवा के विपरीत दिशा में वेग घटता है जबकि हवा की दिशा में वेग बढ़ता है

आद्रता का प्रभाव – आद्रता बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ता है चुकि आद्र वायु में ध्वनि का चाल शुष्क वायु के अपेक्षा अधिक होती है, इसलिए वर्षा ऋतु में रेल के इंजन, सायरन आदि की आवाज ग्रीष्म ऋतु की अपेक्षा अधिक दूरी तक सुनाई देती है

ध्वनि का परावर्तन (Reflection of sound) – जब ध्वनि तरंगे एक माध्यम से चलकर दूसरे माध्यम के पृष्ठ से टकराती है तो टकराने के पश्चात पहले माध्यम में वापस लौट आती है, इसे ध्वनि का परावर्तन कहा जाता है

श्रव्यता सीमा – मानव कान उन्हीं ध्वनि सुनने की क्षमता रखता है जिनकी आवृत्ति 20Hz से 20000Hz के बीच रहती है अतः इस परास (Rang) को श्रव्यता सीमा कहते हैं 20000Hz से ऊपर की आवृत्ति वाली तरंगों को पराश्रव्य तथा 20Hz से कम आवृत्ति वाली तरंगों को अवश्रव्य तरंगे कहते हैं

प्रतिध्वनि (Echo) – ध्वनि का किसी विस्तृत अवरोध से परावर्तन होकर उसके पुनः सुने जाने की घटना को प्रतिध्वनि कहते हैं और स्पष्ट प्रतिध्वनी के लिए परावर्तन अवरोध की न्यूनतम दूरी 16.5 मीटर होनी चाहिए

विवर्तन (Diffraction) – किसी अवरोध के कारण तरंगों की दिशा परिवर्तित विवर्तन कहलाता है ध्वनि तरंगों में विवर्तन सबसे स्पष्ट होता है

डॉप्लर(Doppler) प्रभाव – सापेक्ष गति के कारण स्रोत एवं श्रोता के मध्य आवृत्ति के होने वाले आभासी परिवर्तन की घटना को डॉप्लर प्रभाव कहते हैं इसमें स्रोत एवं श्रोता के बीच की दूरी बढ़ने पर आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से घटती या निकट आने पर बढ़ती है

प्रभाव की शर्तें- (1) स्रोत एवं श्रोता के बीच सापेक्ष गति

(2) ध्वनि के वेग को ध्वनि स्रोत के वेग से अधिक होनी चाहिए

*अपवाद- सुपर सोनिक विमान, जिसकी गति ध्वनि की गति से अधिक है

मैक संख्या- ध्वनि के स्त्रोत का वेग तथा ध्वनि के वेग के अनुपात को मैक संख्या कहते हैं

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